सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को सरकार ने 1 जनवरी 2016 से लागू कर दिया है. वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के अलग-अलग वर्ग में वेतन आयोग (पे कमिशन) की सिफारिशों से जुड़ी कई आपत्तियों पर सरकार ने समिति बनाकर दोनों पक्षों में बातचीत शुरू की. सरकार की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत के लिए जुलाई के महीने में तीन समितियों का गठन किया था. इन समितियों को कर्मचारी नेताओं से बातचीत करके चार महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी.


लेकिन अब खबर है कि बातचीत अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और सरकार ने इन समितियों का कार्यकाल 16apr 2017 तक के लिए बढ़ा दिया है.उल्लेखनीय सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की रिपोर्ट के लागू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतनमान पर अपनी असहमति जताई थी. और सरकार के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की थी. कर्मचारी संगठनों ने साफ कहा था कि उन्हें वेतन आयोग की रिपोर्ट में घोषित न्यूनतम वेतनमान स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने सरकार द्वारा घोषित 18000 रुपये के न्यूनतम वेतनमान को 24000 रुपये करने की मांग की.

इसके अलावा वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले 196 भत्तों को सिकोड़कर केवल 55 पर सीमित करने का भी कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया था. वेतन आयोग ने 196 भत्तों में या तो कई को समाप्त कर दिया या फिर उनका विलय कर दिया. केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले कई संगठनों ने इसका भी विरोध किया और मांग की कि कई भत्ते अंग्रेजों के समय से मिलते आ रहे हैं जिन पर रोक उचित नहीं है