Sunday, 7 May 2017

क्या आप भी फ़ेसबुक चेक न कर पाएं तो हो जाती है टेंशन? केसे पाए टेंशन से छुटकारा जानिए

Image result for facebook.
आज आपके कितने सोशल मीडिया अकाउंट हैं?

फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, वीचैट. व्हाट्सऐप...और भी कई...
आप इन्हें दिन में कितनी बार चेक करते हैं. नए मैसेज, लाइक्स, रिप्लाई या कमेंट को देखने के लिए आप ये सोशल मीडिया अकाउंट कई बार खोलते होंगे.

कई बार ऐसा होता है कि आपको मौक़ा नहीं मिलता कि आप फ़ेसबुक या ट्विटर की फ़ीड चेक कर सकें. ऐसे में आपको टेंशन हो जाती होगी.
वैसे आप अकेले नहीं हैं. पूरी दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें सोशल मीडिया की लत लग गई है. वो अगर सोशल मीडिया अकाउंट चेक नहीं करते तो बेचैन हो जाते हैं.
मनोवैज्ञानिक इसे अब एक लत, एक बीमारी मानने लगे हैं. सोशल मीडिया की लत के शिकार लोग अब बाक़ायदा इससे पीछा छुड़ाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं.
इसे 'डिजिटल डिटॉक्स' का नाम दिया गया है. यानी डिजिटल ज़हर से मुक्ति
ये लत छुड़ाने के लिए लोग तरह-तरह के नुस्खे आज़मा रहे हैं. एक्सपर्ट इस काम में सोशल मीडिया की लत के शिकार लोगों की मदद कर रहे हैं.
अमरीका में तो कई मनोवैज्ञानिक इसके लिए डेढ़ सौ डॉलर प्रति घंटे यानी दस हज़ार रुपए या इससे ज़्यादा फ़ीस वसूल रहे हैं. लंबे सेशन के लिए तो पांच सौ डॉलर प्रति घंटे तक की फ़ीस ले रहे हैं.
मामला ही इतना गंभीर है. आज सोशल मीडिया की लोगों को ऐसी लत लग रही है, जो शराब या दूसरे नशे की लत से भी भयानक है.
अमरीका के न्यूपोर्ट बीच शहर में ऐसी सेवाएं देने वाली पामेला रटलेज कहती हैं कि वो लोगों को तमाम तरह के सबक सिखाती हैं. उन्हें तैराकी सिखाती हैं. ड्राइविंग सिखाती हैं. मगर होता ये है कि लोग सब काम छोड़कर फोन लेकर सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाते हैं.
Image result for facebook.
अमरीका के ह्यूस्टन शहर के थेरेपिस्ट नैथन ड्रिस्केल कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया की लत की बीमारी तेजी से बढ़ी है. उनके पास इससे छुटकारा पाने के लिए आने वालों की तादाद भी काफी बढ़ी है.

ये रफ्तार सालाना बीस फीसद की दर से बढ़ रही है. यानी सोशल मीडिया की लत बड़ी तेजी से महामारी बनने की तरफ बढ़ रही है.
नैथन बताते हैं कि पहले लोग वीडियो और कंप्यूटर गेम की लत से पीछा छुड़ाने की सलाह मांगने आते थे. अब ये सिलसिला कम हुआ है.
फिलहाल तो डॉक्टर सोशल मीडिया की लत को कोई बीमारी नहीं मानते. लेकिन नैथन जैसे कई डॉक्टर ऐसे हैं, जो इसे दिमागी बीमारी मानकर उन्हीं नुस्खों से इसका इलाज करते हैं.
नैथन मानते हैं कि फेसबुक, ट्विटर और स्नैपचैट से हमारे दिमागी सुकून में काफी खलल पड़ता है. इसका इलाज इतना आसान नहीं. नैथन कहते हैं कि शराब की लत छुड़वाना आसान है. ड्रग की लत छुड़वाना भी इतना मुश्किल नहीं, जितना सोशल मीडिया का एडिक्शन.
नैथन ड्रिस्केल की एक घंटे की फीस 150 डॉलर यानी करीब दस हजार रुपए है. और मरीज को उनसे करीब छह महीने तक इलाज कराना होता है, तब जाकर सोशल मीडिया की लत से छुटकारा मिलता है.
क्या आप फ़ोन पर बात करने से डरते हैं?
दिलचस्प बात ये है कि हमेशा ऑनलाइन रहने की लत से छुटकारा दिलाने के लिए कई ऑनलाइन सुविधाएं भी शुरू की गई हैं.
मसलन, न्यूयॉर्क की कंपनी टॉकस्पेस (Talkspace) ने अपने नेटवर्क से करीब एक हजार थेरेपिस्ट जोड़े हैं. ये लोगों को सोशल मीडिया की लत छुड़ाने में ऑनलाइन मदद मुहैया कराते हैं. इनका 12 हफ्ते का कोर्स होता है.
ये कंपनी टेक्स्ट मैसेज के जरिए लोगों की मदद करती है. इसके लिए वो 138 डॉलर महीने की फीस वसूलती है. ऑनलाइन एक्सपर्ट से बात करने के लिए कंपनी करीब 400 डॉलर वसूलती है. जो सोशल मीडिया के मरीज हैं, वो अपने स्मार्टफ़ोन के ज़रिए ही अपना इलाज करते हैं.
फ़ोन पर ही उन्हें फ़ोन कम इस्तेमाल करने के तरीक़े बताए जाते हैं.
कंपनी की प्रमुख लिंडा कहती हैं कि बहुत से लोग पहले तो खुद से ही सोशल मीडिया की लत पर क़ाबू पाने की कोशिश करते हैं. नाकाम रहने पर वो उनकी कंपनी की ऑनलाइन सुविधा का रुख़ करते हैं.
वैसे कुछ जानकार ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है कि सोशल मीडिया की लत दफ्तर की एक चुनौती की तरह देखी जानी चाहिए. इसी तरह इसका इलाज भी होना चाहिए.
लंदन में ओरियाना फील्डिंग, डिजिटल डिटॉक्स कंपनी चलाती हैं. उनकी कंपनी, कई कंपनियों के कर्मचारियों को सोशल मीडिया की लत छुड़ाने में मदद करती है.
उनके लिए वर्कशॉप आयोजित करती है. फिर जो ज़्यादा बीमार हैं, उनके लिए ऑनलाइन हेल्प मॉड्यूल मुहैया कराए जाते हैं. इसके लिए ओरियाना रोज़ाना 748 डॉलर या करीब पचास हज़ार रुपए की फ़ीस वसूलती हैं.
कुछ जानकार कहते हैं कि आप सोशल मीडिया की लत छुड़ाने के लिए सिर्फ एक्सपर्ट के भरोसे न रहें. सिर्फ वीकेंड पर या एक हफ्ते के कोर्स से बात नहीं बनने वाली. आप कुछ दिनों में फिर से उसी आदत के शिकार हो जाएंगे. नैशन ड्रिस्केल कहते हैं कि आप कुछ दिन स्मार्टफ़ोन से दूरी बनाएं. क़ुदरती माहौल में वक़्त गुज़ारें. इससे आपको काफ़ी मदद मिलेगी.

No comments:

Post a Comment